Tuesday, June 13, 2023

लंदन की संसद में कथा यूके द्वारा सम्मानित भोलीबेन का विशेष सम्मान ।

लंदन की संसद में कथा यूके एवं हिन्दी अकादमी मुंबई द्वारा सम्मानित भोलीबेन का विशेष सम्मान ।

(मालव जागृति उत्थान मंच ने  किया साहित्यकारों का सम्मान।)

 आगर मालवा - भोली बेन के नाम से विख्यात मालवा की शान हेमलता शर्मा ने न केवल नगर का गौरव बढ़ाया बल्कि प्रदेश और देश को भी गौरवान्वित किया। यह बात मालव उत्थान जागृति मंच द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं 'आज को ग्यान' पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार प्रहलाद सिंह चौहान ने कही। विशिष्ट अतिथि नगर विधायक विपिन वानखेड़े एवं नगर पालिका अध्यक्ष नीलेश जैन पटेल ने कहा कि मालवी सुविचारों पर प्रथम पुस्तक "आज को ग्यान" का विमोचन करते हुए प्रसन्नता हो रही है। इस पुस्तक में सर्वाधिक  700 से अधिक मालवी सुविचार है। भोली बेन को बहुत बधाइयां। साथ ही मालवी निमाड़ी अकादमी की मांग का भी समर्थन किया । साफा पहनाकर हेमलता शर्मा भोली बेन का अभिनंदन किया गया। संचालन मंच संस्थापक श्री राम शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भोली बेन द्वारा स्वरचित मालवी सरस्वती वंदना से अदिति शर्मा ने की ।



 साथ ही नगर के वरिष्ठ साहित्यकारों को मंच ने सम्मानित किया जिनमें हरीश श्री वास्तव मध्यप्रदेश योग आयोग सदस्य,  आकाशवाणी कलाकार राजेश जी अजनबी, सोयत  से राज्यपाल से पुरस्कृत डॉ दशरथ मसानिया,  श्रीमति रचना सक्सेना, आगर के वरिष्ठ साहित्यकार चंपालाल अजमेरा,  किशनलाल चौधरी , उज्जैन के हास्यव्यंगकार राष्ट्रीय कवि सोमेश्वर शर्मा प्रमुख रहे।  









मध्य प्रदेश परशूराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं मंच के संरक्षक संजय शर्मा द्वारा भोली बेन के हाउस ऑफ कॉमन्स लंदन के प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया गया और भोली बेन ने भी अपने लंदन के अनुभव सबके साथ साझा किए। कथा यूके की संरक्षक ज़किया ज़ुबैरी एवं महासचिव तेजेन्द्र शर्मा, लंदन ईलिंग के सांसद वीरेंद्र शर्मा जी, भारतीय उच्चायोग के समन्वय मंत्री दीपक चौधरी जी एवं प्रमोद पाण्डेय जी का आभार माना । 

आभार प्रदर्शन मंच के सचिव एवं व्याख्याता श्री राम शर्मा द्वारा  किया गया।

Thursday, May 4, 2023

जंगल

 


शीर्षक - जंगल

एक जंगल है हमारी यादों में,

हरियाली की अंतहीन चादर को लपेटे,

जहाँ कितने सुक़ून से उगता है सूरज,

कुहासे की परतों से नाजुकी से!


सारे  शहरों की चकाचौन्ध यहीं से निकली हैं,

पूरी दुनिया में पानी के श्रोत यहीं से निसृत हैं,

झोपड़ों,घरों,अट्टालिकाओं के लिए मिली हैं,

बाँस, बल्ली,ईमारती लकड़ी!


यहीं से निकली  हैं सभी  अन्न,फल,फूल की अनमोल सम्पदा,

पीढ़ी दर पीढ़ी जड़ी बूटियों को सहेजी विरासत,

जिनके दम पर चल रहे हैं,

आज आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों का विपुल व्यापार,

डाबर,पतंजलि,झंडू,वैद्यनाथ!


इन्हीं कुँज, लताओं,गुह्य गह्वरों से निकले  हैं,

ध्यान,चेतना,प्रार्थना के बीच मंत्र,

भाग दौड़ भरे जीवन में शांति के अमर संदेश।


ये जंगल आज भी कहीं सुदूर अंचलों में समेटे हैं,

निरापद कोने में हमारे आदिवासियों का नैसर्गिक जीवन,

कम से कम में सुख और संतोष से जीने की हसरत,

फ़क़त अपने कबीलाई देवता,गीत,नृत्य,

और कुछ ओझा के झाड़  फूँक के साथ!


महानगरों  की भौतिक संतृप्तता से ऊबकर,

बच्चों की गर्मी छुट्टियों में ले जाते हैं,

उन्ही जंगलों को दिखाने के लिए,

जहाँ से हजारों सालों में निकल कर आई है,

सभ्यता और संस्कृति की यह तथाकथित रौनक।

                श्री संजय कुमार,                   वरिष्ठ साहित्यकार, भोपाल

   (लेखक मध्यप्रदेश वित्त सेवा के वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी हैं।)


मालवी अनुवाद - जंगल


एक जंगल हे अपणी याद होण में,

हरियाली की बिना ओर-छोर की चद्दर लपेटे,

जां कित्ता सक़ून से उगे हे सूरज नारायण, 

कुहरा की परतहोण से नेठू नरमलुच्च तरीका से!


सगळा  सेरहोण की चकचूंदी यां से ज हिटी हे,

आखी दुनिया में पाणी का सोता यां से ज जय रिया हे,

झोपड़ी,घर,अट्टालिकाहोण वास्ते  यां से ज मिली हे,

बास-बल्ली, ईमारती लकड़ीहोण !


यां से ज हिटी  हे सगळी  अन्न,फल-फूल की अमोल समपदा,

पीढ़ी दर पीढ़ी जड़ी बूटिहोण की समाली विरासत,

जिनका दम पे चली रयो हे,

आज आयुरवेद अने हरबल चीजांहोण को गंज वेपार,

डाबर,पतंजलि,झंडू,वेदनाथ!


इनी ज क्यारां, लता अने गुफा की गेरई होण से हिट्यो हे,

ध्यान,चेतना, प्रारथना को बीज मंतर,

भाग-दोड़ भरी जिनगी में शांति को अमर संदेस।


ई जंगल आज भी कां ने कां भोत ज दूर अंचलहोण में लय ने बेठ्या हे,

सुरच्छित खुण्या में अपणा आदिवासी होण की सुभाविक जिनगी,

कम से कम में सुख अने संतोस से जीवा की आस,

सिरफ अपणा कबीलई देवता,गीत,नाचहोण,

अने कुछेक 'जाण' की झाड़  फूंक का साते!


महानगर होण  की सांसारिक  देखा-देखी से घबरय ने,

बाल-बच्चाहोण के उनाळा की छुट्टीहोण में लय जाय हे,

उन ज जंगलहोण के दिखाने वास्ते,

जां से हजार साल में हिटी ने अई हे,

सभ्यता अने संस्कृति की यां झूठ-मूठ की रोनक।



 अनुवादक- हेमलता शर्मा भोली बेन इंदौर मध्यप्रदेश


Thursday, March 30, 2023

राम जी की लीला

 

शीर्षक- रामजी की लीला

(रामनोमी विशेष)

राम नाम की धुन सुरीली,

लागे सबके घणी प्यारी हे ।

मर्यादा को पाठ पढ़ायो,

लीला उनकी घणी न्यारी हे ।। 


राम के जिने जनम दियो, 

बा दशरथ-कोशल्या महतारी हे ।

श्री राम भगवान केवाया तो,  

मां-बाप  भी अवतारी हे ।।


जनकसुता से ब्याव रचायो,

जग की पतिव्रता नारी हे ।

केकयी ने वन में भगायो,

दासी मंथरा ने मति मारी हे ।।


राक्षस के वन से भगायो,

शिला पांव मार अहिल्या तारी हे,

शबरी का एठा बोर खाया,

ऐसा भक्तहोण पे बलिहारी हे ।।


रावण कुल को नाश कर् यो,

सिया प्राण से प्यारी हे,

चोदह बरस बितय ने आया,

अयोध्या में मनी दिवारी हे ।।

               स्वरचित

    हेमलता शर्मा भोली बेन

      इंदौर, मध्यप्रदेश






       

Monday, March 13, 2023

मालवी सिली सातम

 मालवा को सिली सातम को तेवार



हिंदू पंचांग का अनुसार चेत मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के शीतला सप्तमी का रूप में मनायो जाय हे । हिंदू पोराणिक कथानुसार  सीतला माता के चेचक की देवी मान्यो गयो हे।  उनके देवी पार्वती अने देवी दुर्गा को अवतार मान्यो जाय हे, यो बरत  माता होण बच्‍चाहोण का अच्छा सुवास्‍थ्‍य अने उनकी दीर्घायु की कामना वास्ते रखे हे।

पूजा विधि -

इना दन परोड़े उठी ने ठंडा पाणी से बयरा होण स्नान करें ने सीतला स्त्रोत को पाठ करी ने कथा-बारता सुनें। आज का दन ठंडो सीलो ज माताजी के भोग में चढ़े हे अने घर में ताजो भोजन नी बणे । 

सीतला माता की पूजा असे करो-

एक थाली में दई, रोटी, पुआ, बाजरो, नमक पारा, मठरी अने मीठा चोखा रखो. दूसरी थाली में आटा को दीवो बणय ने रखो. रोली, वस्त्र अक्षत, सिक्को अने मेहंदी रखो । माताजी को साज सिंगार रखो अने ठंडा पाणी से भरियो लोटो रखो । सीतला माता का मंदर में माताजी की पूजा करी ने बिना  जल्यो दीवो रखी दो अने थाली में रख्यो भोग चढ़य दो.

माहत्तम-

स्‍कंद पुराण का अनुसार सीतला माता को वाहन गद्दो हे अने हाथहोण में कलश, बुआरी, सूपड़ो धारण करें ।असी मानता है कि माताजी बच्‍चा होण की बुखार, खसरा, चेचक, आंख का रोग से रक्षा करे हे। इनी तेवार के मनाने के वास्ते लोग एक दन पेला ज राते बासी भोजन तय्यार करी ले अने उको ज भोग लगावे ने परसादी का रूप में उ ज खावे । सिली सातम पे सीतला माता की पूजा करी ने बासी चीज को भोग लगाने से आरोग्‍य को वरदान मिले हे। माता सीतला अपणा बच्‍चहोण की गंभीर बीमारी होण से रक्षा करे, असी मानता हे। इका पीछे वेज्ञानिक कारण भी हे। ठंड को मोसम खतम हुय के गरमी की सुरुआत होली का बाद से ज हुई जाय हे तो मोसम का परिवर्तन से होने वाली बीमारी होण से बचने अने अपणा शरीर के मोसम का हिसाब से अनुकूलित करने वास्ते यो बरत उपयोगी हे। बदल्यो मोसम बच्घा होण के ज जादे चपेट में ले इका लिए इके उनकी सुरक्षा से जोड़ी के देख्यो जाय।

पूजा को शुभ मोरत -

हिंदू पंचांग का अनुसार, चेत माह की कृष्ण पक्ष की सीतला सप्तमी 13 मार्च 2023 की रात 9 बजी ने 27 मिनट से सुरू हुय जायगी जो  14 मार्च की रात 8 बजी ने 22 मिनट तक रेगी। उदया तिथि की मानता का अनुसार इको बरत 14 मार्च मतलब कि आज रख्यो जायगो।

सावधानी - 

आज का दन बाल बच्चा होण की मां के माथो नी धोनो चिए आने बाल भी नी कटाना चिए । आज का दन कपड़ा-लत्ता भी नी सिवना चिए,  सुई में तागो नी पिरोनो चिए ।  खासकर गरभवती बयरा होण के विशेष ध्यान रखनो चिए । 

कथा/बारता- 

एक गाम में ब्राह्मण जोड़ो रेतो थो। उनका चार बेटा-बऊ था । बारी बारी से चारी बऊ रसोई बणाती ।  जसे-तसे दन बीत्या ने होली गई । अब्बे सिली सातम अई तो छोटी बऊ की रसोई की बारी थी । सासू ने बऊ से कयो के ठंडो सीलो करी लो सुबे माताजी के भोग लगेगा । छोटी बऊ के छोटो नानो थो उके सुवाड़ने में बऊ की नींद लगी गी ने सुबे आंख खुली । बऊ ने सोच्यो परसाद तो बण्यो नी तो झटपट उने भांडी में दाल रांदी दी ने बाटी सेंकी दी, खूब घी तड़तड़य ने डाली दियो । अने पूजा वास्ते थाल तय्यार करी ल्यो । झटपट गई ने सबका पेला पूजा करी अई । नरी देर बाद बऊ के याद आयो के नानो झोली में कद से ज सोयो हे उके दूध पिवाड़ी दूं । झोली में जय ने देख्यो तो नानो तो मरी ग्यो अब्बे बऊ रोने धोने लगी ने सासू के केणे लगी तमने कजनकां को बरत करियो ने म्हारो छोरो मरी ग्यो तम इके जिंदो करी ने लाव।  सासू के तो काटो तो खून नी। बिचारी छोरा के खोल्या में लय ने भूखी प्यासी चली रोती जाय। रस्ता में उके एक डोकरी मिली जिसके हाथ पाटा, पग पाटा ने कुरूप। डोकरी ने पूछ्यो तू इनी छोरा के लय ने कां जाय तो सासू बोली म्हारी बऊ ने म्हारे कलंक लगायो हे छोरा के म्हारा माथे करियो हे तो जां सीतला माता मिलेगा वां जऊंगा ने छोरा के जिंदो करने की बिनती करुवां। माताजी बोली के यो तो नी होयगा। हूं ज सीतला माता हूं । 

थारी बऊ राते सोयगी ने सूबे उठी ने दाल रांदी तो म्हारी सब दाल बळी गी, बांटी सेकी ने घी कड़कड़ायो तो म्हारा दांत टूटी ग्या। रयोसयो संग गरम गरम म्हारा उपर कुड़ी गी तो हूं आखी बळी गी । मैंने सराप दियो तो उको छोरो मरी ग्यो। 

           सासू ने छोरा के माताजी का चरण में रख्यो ने कयो बऊ की करनी वा जाणे पण छोरा के तो जीवतो करनो पड़ेगा नी तो हूं तो भूखीप्यासी यां ज जीव दूंवा क्यवंकि बऊ ने म्हारे कलंक बांध्यो हे ने तमारा नाम को अपमान हुय रयो हे। माताजी के दया अई तो छोरा पे अमरत को छींटो डाल्यो। झट नानो रोवा लगी ग्यो। सासू ने माताजी का हाथ जोड़्या ने सीतला माता का ओटला पे जय ने नाना के बेठय दियो। 

           वईं कलाप करती बऊ के पड़ोसन ने खबर दी कि थारी सासू तो सीतला माता का ओटला पे बेठी हे ने नानो तो खेली रयो हे। इत्तो सुणता ज बऊ ने दोड़ी ने सासू का पांव पकड़्या ने माफी मांगी। सांची बात बतई के म्हारी नींद लगने से गरम भोजन माताजी के चड़य दियो थो। सासू बोली थारा करम से माताजी ने सराप दियो थो तो नानो मरी ग्यो थो पण अब्बे तू प्रण कर के हरेक सिली सातम पे ठंडो सिलो बणय ने माताजी की पूजा करेगा ने ठंडो ज खावेगा। इनी शरत पे माताजी ने नाना के जीवन दान दियो हे। बऊ ने माताजी के धोक लगय ने प्रण करियो जद से इनी बरत को प्रचलन हुवो ने बच्चा होण की मां सिली सातम करने लगी। 

           हे सीतला माता जसे बऊ के कष्ट दियो असो कोई के मत दीजो ने जसे सासू पे टूटमान हुई सबकोय पे होजो। जे सीतला माता की। 

 


 

                      तमारी आपणी

                            भोली बेन 


Saturday, March 11, 2023

लघुकथा - बोझिल रिश्ते

 


               बोझिल रिश्ते 

               

               संध्या अपने पिता का घर छोड़कर राजेश के साथ लिव-ईन में रह रही थी । पिता ने उसे समझाने की बहुतेरी कोशिश की - "बेटी हमारे यहां विवाह एक संस्कार है, जिस पर हमारा सामाजिक ढांचा निर्भर करता है और फिर लिव-ईन में तुम्हारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं। राजेश से ही ब्याह रचा लो।" 

               "नहीं पापा शादी के बाद के झंझट कौन पाले । अभी तो हम दोनों स्वतंत्र हैं । अपना-अपना काम करते हैं और कोई जिम्मेदारी का बोझ भी नहीं , न सास-ननद और जेठानी का हेडेक । मैं आफिस के लिए लेट हो रही हूं!" कहकर संध्या चलतीं बनी ।

               पिता मन ही मन सोच रहे थे -पारिवारिक रिश्ते और जवाबदारियां नई पीढ़ी के बच्चों को बोझ लग रहे हैं! समाज कहां जा रहा है, क्या हमारी परवरिश में कोई खामी है, इसी उधेड़बुन में कब अपने घर पहुंच गए, पता ही नहीं चला । 

                 

                   स्वरचित

         हेमलता शर्मा भोली बेन 

             इंदौर मध्यप्रदेश 



Sunday, March 5, 2023

अखिल भारतीय ज्योतिष अधिवेशन एवं अलंकरण समारोह

 


अभिभूत हूं कि आज पूरे देश भर से अखिल भारतीय ज्योतिष अधिवेशन एवं अलंकरण समारोह में पधारे ख्यात ज्योतिष और वास्तु मनीषियों के साथ मंचासीन होकर उनके ज्ञान को श्रवण करने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ जिसका श्रेय जाता है 



प्राच्य विद्या अनुसंधान संगठन इंदौर की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती आभा जैन जी, संरक्षक योगेन्द्र महंत जी भाई साहब, नीलेश गोधा जी, देवेन्द्र सिंघई जी, राजकुमार अग्रवाल जी सहित सम्पूर्ण आयोजन समिति को । 





विशिष्ट अतिथि के रूप में सबको मालवी लोकभाषा और मालवा की लोक संस्कृति से परिचित कराने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। सभी को साधुवाद एवं हृदय से आभार।

😀❤️💐🙏🏻

Sunday, February 19, 2023

सोमेती अमावस को माहत्तम

       सोमेती अमावस को माहत्तम

सोमेती अमावस को हिंदू धरम में विशेष माहत्तम हे. सोमवार के पड़ने वाली अमावस के सोमेती अमावस बोल्यो जाय हे. अपणा शास्त्र होण में सोमेती अमावस का दन माता पारवती अने भगवान शिवजी की पूजा को विधान बतायो गयो हे. इना दन पीपल का झाड़ की पूजा करी जाय हे.इना दन मानतानुसार पितरु की शांति वास्ते तरपण करयो जाय हे । पितर होण के परसन करने वास्ते काली तिल्ली को दान भी करयो जाय हे । 

पूजा विधि -

परोड़े हद्दी उठी ने बयरा होण के न्हाणो चिए ने साफ-सुंदर धोती पेरी ने पीपल का झाड़ की पूजा अक्षत, कंकु  से करनी चिए ने नाड़ो बांधनो चिए। 108 फेरा लगाने की परम्परा भी हे, जिनी वस्तु को दान करनो हे, उकी संख्या 108 होय तो घणों हऊ नी तो सवा किलो से भी फेरा लगय सको ने फेर वा वस्तु सुहागन होण के बांटी जाय हे ने सगला बड़ा-बूढ़ा का पांव पड़ी ने सुहाग को आसीरवाद लियो जाय हे। बूढ़ा-ढाड़ा मनख भी "अखंड सौभाग्यवती भव:" "सदा सुहागन रो", "जुग-जुग जीवो" , "दुधो न्हाव पूतो फलो" सरीखा आसीरवाद की बरसात करी दे हे। 

       गरुड़ पुराण में बतायो गयो हे के सोमेती अमावस पे धोती, गमछा समेत अन्य वस्त्रहोण को दान करने से पितरू परसन हुई जाय हे। सोमेती अमावस का दन दान देती बखत हाथ में तिल लय ने दान करनो चिए। 

सोमेती अमावस को माहत्तम-

इनी पावन दन पितरू को तरपण करने से उनको विशेष आसीरवाद मिले अने जीवन में सुख- समृद्धि की प्राप्ति होय हे। इना दन पवित्र नद्दी होण में स्नान को भी विशेष माहात्तम होय हे। सोमेती अमावस का दन भगवान शिव की पूजा- अरचना करने से सगली मनोकामना पूरी हुय जाय हे । आज का दन भोलेनाथ अने माता पारवती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होय हे. सुहागन बयरा होण  अपणा धणी की लंबी आयु वास्ते बरत करें अने पीपल का झाड़ की पूजा करे हे जिससे शुभ फल की प्राप्ति होय हे । 

सोमेती अमावस बरत की कथा-

एक गरीब ब्राह्मण परिवार थो, जिमे  उसकी एक पुत्री भी थी। उनकी पुत्री   सुंदर, संस्कारवान अने गुणवान थी, पण गरीब होने का कारण उको ब्याव नी हुई पय रयो थो।

         एक दन उनी बामण का घर एक साधु महाराज पधारिया। साधु उनी कन्या का सेवाभाव से घणा प्रसन्न हुई ग्या । कन्या के लंबी आयु को आसीरवाद देती बखत साधु ने कयो के इनी कन्या का हाथ में ब्याव की रेखा नी हे तो दोय मनख दुखी हुई ग्या ने साधु महाराज से उपाय पूछ्यो साधु महाराज ने ध्यान लगय ने बतायो के कुछेक दूरी पे एक गांव में सोना नाम की एक धोबण अपना बेटा- बऊ का साते रे हे, जो घणी ही आचार-विचार वाली, संस्कार संपन्न अने पति परायण हे। यदि या सुकन्या उनी धोबण की सेवा करे अने वा धोबण इकी मांग में अपणी मांग को सिंदूर लगय दे, तो इको ब्याव हुई जायगा । 

           साधु महाराज की बात सुणी ने बामणी ने अपनी बेटी से धोबण की सेवा करने की बात करी । अगला दन से ज कन्या परोड़े-परोड़े उठी ने सोना धोबण का घर जय ने साफ-सफई ने उका घर का सगला काम करी ने अपणा घरे वापस आणे लगी।

        एक दन सोना धोबण ने अपणी बऊ से पूछ्यो- बऊ तू तो सुबे पेलां ज उठी ने सगला काम निपटय ले म्हारे तो पतो भी नी चले।

           बहू ने कयो- माँ जी, मने तो सोच्यो के तम सबका पेलां उठी ने सगला काम निपटय लो हो । हूं तो देर से उठू  ।  यो  सब जाणी ने दोय सास-बऊ घर की निगरानी करने लगी कि कुण हे जो सुबे पेली घर को सगलो काम करी ने चल्यो जाय हे ।


            नरा दन बाद धोबण ने देख्यो के एक कन्या मुं ढक्या इंदारा में घर में आय ने सगला काम करने का बाद चली जाय । जद वा जाने लगी तो सोना धोबण उका पांव में पड़ी ने पूछने लगी के तू कुण हे अने असे छिपी ने म्हारा घर की चाकरी क्यों करी री हे?

             तो कन्या ने साधु की सारी बात बतई। सोना धोबण पति परायण थी उमे तेज थो। उने जसे ज अपणी मांग को सिन्दूर उनी कन्या की मांग में लगायो, सोना धोबण को पति मरी ग्यो  तो सोना धोबण घर से निराजल चली । उना दन सोमेती अमावस थी । उने ईंट का टुकड़ा से 108 बार फेरा दय ने  पीपल का झाड़ की परकम्मा करी ने जल ग्रहण करयो। असो करते ज उको धणी जीवी उठ्यो तो जद से ज सोमेती अमावस मनने लगी। हे सोमेती अमावस माता जसे उनी धोबण के ने कन्या के सुहाग दियो असो सबके अम्मर सुहाग दीजो। 



               स्वलिखित

          हेमलता शर्मा भोली बेन

            


मालवा का‌ लोकगीत

सगळा जणा के जे राम जी की ।               आव आज अपण सगळा लोकगीतां की‌ बात करा। किनी भी लोकभाषा के सीखने, समजने को भोत जोरदार रस्तो हे - लोकगी...