मालवी निमाड़ी अकादमी होनी ही चाहिए ।
मालवी निमाड़ी अकादमी की स्थापना के संबंध में जानिए वरिष्ठ साहित्यकारों और आम जनता की राय ।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ साधना बलवटे जी, भोपाल कहती हैं- अपनी बोली यानि अपनी मातृभाषा। माँ से अधिक क्या अपना होता है। जब हम अपना कहते हैं उस शब्द का अर्थ ध्वनित होता है अपनत्व से भरा और जब हम अपनी बोली की बात करते हैं, तब संपूर्ण आत्मीय वातावरण हमारे सामने उपस्थित हो जाता है । हम सबको अपनी बोली से अत्यधिक प्रेम होता है क्योंकि उस बोली में हमारे संस्कार है हमारी जीवन शैली है हमारा जीवन दर्शन है और सबसे अधिक और महत्वपूर्ण बात अपनी बोली में अपने अस्तित्व का गौरव है जो हमें किसी भी औपचारिक भाषा में नहीं मिलता है जीवन के सारे भावों को जिस सहजता से अपनी बोली में व्यक्त किया जा सकता है दुनिया की किसी अन्य भाषा में उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता। मालवी और निमाड़ी हमारे अंचल की सबसे मीठी बोलियाॅं है, एक माॅं है तो दूसरी माॅंसी। ममत्व के रिश्ते मे़ं ही तो स्नेह है, ममता है, हमारे होने का गौरव है।बस इसी सब को सहेजना चाहते हैं और इसका सबसे अच्छा और इकलौता माध्यम है, अकादमी। बस इसीलिए मालवी निमाड़ी अकादमी की दरकार है और दरकार है तो उसे पूरा भी होना चाहिए।
वरिष्ठ साहित्यकारा अलका भार्गव जी, इंदौर से अपने विचार रखती हैं- लोकभाषा ,लोकसंस्कृति जड़ों से जुड़े रहने का सबसे आसान तरीका है।पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में ,हम जिन जड़ों से कटते जा रहे हैं वो हमारी बोलियाँ भी हैं।मध्यप्रदेश का संस्कृति ध्वज अब ऐसे हाँथों में है ,जहाँ आश्वस्ति के साथ हम संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर जी से मालवी निमाड़ी अकादमी बनाने का अनुरोध कर सकते है, नई पीढ़ी को हस्तांतरित करने का ये श्रेष्ठ उपहार होगा।
वरिष्ठ लेखिका मंजुला भूतड़ा जी इंदौर से अपने विचार रखती हैं- बिल्कुल सही विचार।मालवी और निमाड़ी बोलियां तो हमारे मालवा की प्राण हैं।मिठास और अपनेपन से परिपूर्ण, यह बोलियां हमारी एक विशेष पहचान बताती हैं।इनका अस्तित्व बना रहे, इसके लिए संरक्षण और संवर्धन की बहुत आवश्यकता है। यह गौरव बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास होने चाहिए।
जय राम जी की।
कालापीपल, शाजापुर से कैलाश परमार जी, मालवी दोहाकार कहते हैं- क्यों आवश्यक है मालवी निमाड़ी अकादमी की स्थापना?
किसी भी व्यक्ति का जन्म जिस माँ की कोख से होता है ,जिसकी गोद में पलता बढ़ता है । उस माँ की जो बोली या भाषा होती है ।वही उसकी मातृबोली या यूँ कहें कि उसकी मातृभषा होती है ।
मालवा निमाड़ क्षेत्र मध्यप्रदेश के एक विशाल भू भाग में फैला है । इस भू भाग पर रहने वाले लोग मालवी निमाड़ी बोलते हैं । किन्तु अभी तक मालवी निमाड़ी के पल्लवन पोषण के लिए इनके विकास के लिए इनके साहित्य के लेखन के प्रोत्साहन के लिए कोई विशेष योजनाएँ नही बनी हैं।
यदि इन बोलियों को उचित संरक्षण और प्रोत्साहन मिले तो निश्चय ही ये समृद्ध भाषा के रुप में विकसित हो पाएगी और मालव निमाड़ी संस्कृति अक्षुण्ण बनी रहेगी साथ ही मालवी निमाड़ी बोलियों का भाषा के रुप में विकसित होना हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी को समृद्ध बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा ।साथ ही मालवी निमाड़ी अकादमी की स्थापना मालवा और निमाड़ क्षेत्र के लिए वरदान सिद्ध होगी।
मालवी निमाड़ी प्रेमी अजय सोलंकी जी, भोपाल कहते हैं - मालवी निमाड़ी साहित्य अकादमी होनी चाहिए भोपाल में जैसे उर्दू अकादमी सिंधी अकादमी Marathi akadami बहुत सारी एकेडमी है बालगंगा चौराहे पर मुल्लाह रामोजी अकादमी के अंदर बहुत सारी अकादमी चलती है आप इसे बचाने का अच्छा प्रयास कर रही है धीरे-धीरे सभी विलुप्त होती जा रही है ।
आप भी अपनी राय समर्थन में दर्ज कीजिए ।
निवेदक
आपकी अपनी भोली बेन
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