Sunday, September 22, 2024

बेटी दिवस

शीर्षक-बेटी दिवस 











बेटी दिवस मनाने वाले कई,

कोख में मरवा देते हैं बेटियां ।

बेटों से बुढ़ापे में ठोकर खाते,

आग में झुलसा देते हैं बेटियां ।।


बेटी दिवस मनाने वाले कई,

गैरों से लुटवा देते हैं बेटियां ।

न‌  जाने  कौन-से बाजार में,

बिकवा देते हैं लाचार बेटियां ।।


बेटी दिवस मनाने वाले कई,

शान पर बलि चढ़ाते हैं बेटियां । 

न पूछो उनसे कहानी कोई,

सच को छुपा लेती हैं बेटियां ।।


बेटी दिवस मनाने वाले कई,

अंधेरे में फेंक जाते हैं बेटियां।

मजबूर, लाचार, दुखी होकर,

दोहरा दायित्व निभाती हैं बेटियां ।।


                           स्वरचित 

                  हेमलता शर्मा भोली बेन 

                       इंदौर मध्यप्रदेश 


2 comments:

  1. सही कहा। हम दोहरे चरित्र में जीने वाले हैं।-- 😔

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    1. बिल्कुल सही कहा आपने आदरणीया 😊🙏💐

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